बैठी है झरोखे प्यारी कुंज
Ras Ke Pada —
Verse 23 of 28
(राग केदार)
पीय साँवरें के संगि बनी बिहारिनि अतिछबि पावे। [1]
नवसत साजे अंग सुभग छबि तरंग निरखत मोहिनी लजावे॥ [2]
बदन इंदु लजाइ मोहन रहे लुभाइ खेलत रास मंडल अतिहितु उपजावे। [3]
केवल बनी है जोरी नवल राधा किसोरी देख्यें रतिपति मुरछावे॥ [4]
- श्री केवल राम जी, रास मान के पद (104)
(राग केदारा) प्रिय बानी बिहारिणी की संगति में बड़ा सुख मिलता है। [1] नवसत साजे अंग सुभग छवि तरंग निराखत मोहिनी लाजावे.. [2] शरीर इंदु लाजै मोहन रहे लुभाय खेलत रस मंडल अतिहितु उपजावे। [3] केवल बनी है जोरी नवल राधा किसोरी देख्येन रतिपति मुराछवे.. [4] - श्री केवल राम जी, रस मन के पद (104)