रसिकवर रसिकनी रस रासि

Ras Ke Pada —

Verse 5 of 28

हौं हूँ आई देखन स्याम। सुन्दर नैन बिसाल साँवरौ, सब विधि पूरन काम॥ [1] हा-हा करत, तकत गति अगनति, प्रानप्रिया सुखधाम। श्रीललितमोहिनी कौ सुख पूरन, जामें बिहरैं आठों जाम॥ [2] - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (46) हाँ, हाँ, सियाम देखें। सुन्दर आँखें, सुन्दर आँखें, सारा पुराना काम। श्री ललितमोहिनी कौ सुख पुराण, जामें बिहारें आठों जाम.. [2] - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस पद (46)
रसिकवर रसिकनी रस रासिरसिकवर रसिकनी रस रासि