रसिकवर रसिकनी रस रासि
Ras Ke Pada —
Verse 7 of 28
मत्त भये तन-मन न सँभार।
उपजत अति आनंद दुहूं दिसि, ए उनकौ वे इनकौ हार॥ [1]
बारौं कोटि अनंग मदन दल, डारौं तुव लगि सब सुख वार।
श्रीललितमोहिनी के घर आनंद, यह सुख-सार बिहार निहार॥ [2]
- श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (60)
यदि आप नशे में हैं तो आप अपने शरीर और दिमाग पर नियंत्रण नहीं रख पाएंगे। उपजात अति आनंद दुहूं दिसि, ई अंकौ वे इंकौ हर.. [1] बरौं कोटि अंग मदन दल, दारौं तुव लागी सब सुख वर। श्री ललिता मोहिनी के घर यही आनंद है - सर बिहार निहार.. [2] - श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, हित के छंद (60)