रसिकवर रसिकनी रस रासि
Ras Ke Pada —
Verse 8 of 28
पिय पियरी सेज बनाई आज।
पियरी झलक, चमक सब पियरे, पियरे बसन बने सब काज॥ [1]
पियरे फूल बने सब तन में, पियरी सोभा सहज समाज।
श्रीललितमोहिनी यह सुख देखत, स्याम तनैं पियरे सब साज॥ [2]
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (47)
आज प्रियजन साधु हो गये। प्यारी झलक, चमक, सब चीजें प्यारी हो जाती हैं, सब चीजें प्यारी शरीर बन जाती हैं... [1] शरीर में सभी चीजें प्यारे फूल बन जाती हैं, प्यारी सुंदरता सहज समाज बन जाती है। श्री ललितमोहिनी यः सुख देखत, स्याम तनैन प्यारे सब सज.. [2] - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के छंद (47)