रसिकवर रसिकनी रस रासि

Ras Ke Pada —

Verse 9 of 28

प्रानप्रिया सखि आजु बनी। ओढ़े नीलांबर बिहरति, रति काम केलि रस माँझ सनी॥ [1] उमँँगि उमँँगि मिलि कुँवर स्याम तन, औरैं ठान ठनी। श्रीललितमोहिनी लाड़ लड़ावत, त्यौं त्यौं बरषत प्रेम घनी॥ [2] - श्री ललित मोहिनी देव, श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, रस के पद (54) प्राणप्रिया सखी आजु बानी। ओधे नीलानबर बिहारति, रति काम केलि रस मंज सानी.. [1] उमनगी उमनगी मिलि कुँवर स्यामा तन, औरैन ठन थानी। श्री ललित मोहिनी ने युद्ध किया, घनघोर वर्षा हुई.. [2] - श्री ललित मोहिनी देव, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के छंद (54)
रसिकवर रसिकनी रस रासिरसिकवर रसिकनी रस रासि