महल ते निकसी न बाहर आवैं

Rasik Dev Vani — श्री रसिक देव

Verse 2 of 9

खटकौ नहीं उसास को, ना काहू सौं भाव। गौर स्याम मन में अरे , लख आवहु लख जाव॥ - श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, रस की साखी (10) उसे मत मारो, उससे कुछ मत कहो। गौर स्याम मन नर हैं, लख अवहु लख जाव.. - श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, रस की साखी (10)
दूलह दुलहिन अधिक बनीमहल ते निकसी न बाहर आवैं