महल ते निकसी न बाहर आवैं

Rasik Dev Vani — श्री रसिक देव

Verse 3 of 9

महल ते निकसी न बाहर आवैं, कुंज-कुंज प्रति खेल मचावें। वन उपवन बाहर की लीला, नन्दकुमार करत तहाँ क्रीला॥ - श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी महल में जगह नहीं, बहार नहीं, हर बाग़ में खेल है। वन वाटिका, वसंत क्रीड़ाएँ, वहाँ नन्दकुमार क्रीड़ाएँ... - श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी के वचन
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