महल ते निकसी न बाहर आवैं

Rasik Dev Vani — श्री रसिक देव

Verse 5 of 9

रसिक निमिष नहिं बीछुरैं, ना दुरि बैठें और। एतो माँन बिहार में, मुरत नैंन की कोर॥ - श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, रस की साखी (1) मैं रोमांटिक अंदाज में न तो पलकें झपकती हूं और न ही दूर बैठती हूं. ये बिहार में मेरा दिल है, मेरी आँखों का कोर... - श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, रस की साखी (1)
महल ते निकसी न बाहर आवैंश्रीबिहारीजू खेलत बसंत