प्रभुता दासी ह्वैं रहे, ढूंढ़े मिलैं न मूल।
Rasik Mohini — श्री प्रियादास
Verse 16 of 27
प्रभुता दासी ह्वैं रहे, ढूंढ़े मिलैं न मूल।
जब अटक्यौ या धाम सों, होत सबै अनुकूल॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (14)
संप्रभुता गुलाम हो गई है, आओ हम अपना मूल खोजें। जब अटकयौ या धाम पुत्र, सब कुछ अनुकूल.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (14)