प्रगट करी व्रज भूमि मधि, श्री वृंदावन धाम।

Rasik Mohini — श्री प्रियादास

Verse 17 of 27

प्रगट करी व्रज भूमि मधि, श्री वृंदावन धाम। ताकि छवि कवि कही थके, सब जन मन अभिराम॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (3) प्रकट करो व्रज भूमि मढ़ी, श्री वृन्दावन धाम। ताकि जब कवि थक जाए तो सबके मन प्रसन्न हो जाएं.. - श्री प्रियादास जी, रोमांटिक मोहिनी (3)
प्रभुता दासी ह्वैं रहे, ढूंढ़े मिलैं न मूल।प्रेम सरोवर प्रेम सों, पूरन परम रसाल।