प्रेम सरोवर प्रेम सों, पूरन परम रसाल।

Rasik Mohini — श्री प्रियादास

Verse 18 of 27

प्रेम सरोवर प्रेम सों, पूरन परम रसाल। नेंकु नीर के परसितें, वसें हिये जुग लाल॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (25) प्रेम सरोवर प्रेम पुत्र, पूरन परम रसाल। नेनकु नीर के परसितेन, वसेन हिये जुग लाल.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (25)
प्रगट करी व्रज भूमि मधि, श्री वृंदावन धाम।राधा वल्लभ लाल को, दुर्लभ दरसन पाय।