राधा वल्लभ लाल को, दुर्लभ दरसन पाय।

Rasik Mohini — श्री प्रियादास

Verse 19 of 27

राधा वल्लभ लाल को, दुर्लभ दरसन पाय। सुल्लभ श्रीवन कृपा तें, हूल्यौ अंगन माय॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (68) राधावल्लभ लाल के दुर्लभ दर्शन हुए। सुलभ श्रीवन कृपा तेन, हुल्यौ आंगन मय.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (68)
प्रेम सरोवर प्रेम सों, पूरन परम रसाल।रसिक जननी के संग सों न्यारो कभू न होय।