रसिक जननी के संग सों न्यारो कभू न होय।

Rasik Mohini — श्री प्रियादास

Verse 20 of 27

रसिक जननी के संग सों न्यारो कभू न होय। जो एकांत चित में रुचै तऊ घरी भरी दोय॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (83) एक बेटे को अपनी प्यारी माँ के साथ कभी भी अकेला नहीं रहना चाहिए। अगर आपको एकांत में रुचि है तो आपका घर भारी है.. - श्री प्रियादास जी, रोमांटिक मोहिनी (83)
राधा वल्लभ लाल को, दुर्लभ दरसन पाय।रीझि परे छवि धाम पर, करि नौंछावरि देह।