रीझि परे छवि धाम पर, करि नौंछावरि देह।
Rasik Mohini — श्री प्रियादास
Verse 21 of 27
रीझि परे छवि धाम पर, करि नौंछावरि देह।
तब तिय सुत धन आदि दैं, पूछै को तुझ गेह॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (20)
रीझी पारे छवि धाम पर, कारी नौछावरी देह। फिर जब तुम सो जाओ तो मैं तुमसे तुम्हारी संपत्ति के बारे में पूछता हूं.. - श्री प्रियादास जी, रोमांटिक मोहिनी (20)