श्री बैकुंठ गोलोक लों, गए परम रस चाह।
Rasik Mohini — श्री प्रियादास
Verse 22 of 27
श्री बैकुंठ गोलोक लों, गए परम रस चाह।
फिर आए वृंदाविपिन, सबको सुख अवगाह॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (93)
श्री बैकुंठ गोलोक लोन परम प्रेम गाओ। तब हे वृंदाविपिन, सबको सुख दो.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (93)