श्री वृंदावन धाम में, साधक सुख अवगाऊ।
Rasik Mohini — श्री प्रियादास
Verse 23 of 27
श्री वृंदावन धाम में, साधक सुख अवगाऊ।
मगन होत रस सिंधु में, भूले सिध की चाऊ॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (9)
श्री वृन्दावन धाम पुरुष है, सुख का साधक है। सिन्धु नर अपनी मौज में मस्त है, भूल गया है सिद्ध की चौपाई.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (9)