श्री वृंदावन माधुरी मदलों चढ़ी विसाल।
Rasik Mohini — श्री प्रियादास
Verse 24 of 27
श्री वृंदावन माधुरी मदलों चढ़ी विसाल।
तब उंगार गुण रूप छवि राधा मोहनलाल॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (17)
श्री वृन्दावन मधुर मदालों चारदी विसाल। फिर राधा मोहनलाल के अंगारे, गुण, रूप और छवि.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (17)