ताते वृंदावन बसो, वृंदावन लेवो नाम।

Rasik Mohini — श्री प्रियादास

Verse 26 of 27

ताते वृंदावन बसो, वृंदावन लेवो नाम। पल छिन कबहूँ जिन तजौ फिर कब पावो धाम॥ - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (99) ताते वृन्दावन बसो, वृन्दावन लेवो नाम। कब छीन लूँगा क्षण, कब पाऊँगा ठिकाना.. - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (99)
सोवत जागत रैन दिन, चलत फिरत सुष होत।तजि के सब पौरस प्रबल, मानें तन गुण हीन।