प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर
Rasik Pachchisi — श्री रूप माधुरी
Verse 3 of 6
प्राणजीवन के नेह में, तन मन से रहे चूर।
घर में कै बन में रहैं, सोई रसिकजन सूर॥
- श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, रसिक पच्चीसी (10)
मेरे दिल का प्यारा आदमी तन और मन से टूट गया था। घर में कैसा लगेगा, सोई रसिकजन सूर.. - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की आवाज, रसिक पचीसी (10)