लटकत आावत बाहाँ जोरी

Samay Prabandha — श्री अलबेली अलि

Verse 13 of 19

पायन पायली जगमग जोति। नव नवरतन दीप से सोहैं, टोरा बड़िडे मोती॥ [1] ता पर नुपुर सुभग बिराजें, केलि कला उद्योति। अलबेली पिय हिय को गहिनो, नवल प्रेम रस सोती॥ [2] - श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (109) पायन पायल चमकती रोशनी। नव नवरतन डुबकी से सोहन, तोरा बड़े मोती.. [1] ता पर नूपुर सुभग बिराजेन, केली कला उद्योति। अलबेली पिया हिय को गहिनो, नवल प्रेम रस सोती.. [2] - श्री अलबेली अली, समय प्रबंधन (109)
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