रुनकि-झुनकि आवति कुंजनि तैं

Samay Prabandha — श्री अलबेली अलि

Verse 17 of 19

(राग विभास) आवति कुंजन तें गरबहियाँ। मदमाते अरसाते दम्पत्ति, डगमग अवनि धरत हैं पैंयाँ॥ [1] छोर रहे छुटि नील पीत पट, जात सम्हारत सखि दोउ घैंयाँ। [2] डर-डर जात समात मुदित मन, अलबेलीअलि भुज गहि गहियाँ॥ [3] - श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (83) (राग विभासा) अवति कुंजन तेन गर्बहियां। नशे में धुत जोड़े, डगमगाते कदम इस धरती के.. [1] कुछ भी न छोड़कर, दोनों बहनों को अपनी जाति प्यारी है। [2].
लटकत आावत बाहाँ जोरीलटकत आावत बाहाँ जोरी