लटकत आावत बाहाँ जोरी
Samay Prabandha — श्री अलबेली अलि
Verse 6 of 19
गहैं चरन कल ललन लुभावैं।
सहज अरुन मेहंदी रँग राते, जावक चित्र बनावैं॥ [1]
चूंबि चूंबि छ्वावति नैननि कों, हियें लियें रहि जावैं।
हँसि हँसि खैंचत पग अलबेली, अलि लम्पट संग धावैं॥ [2]
- श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (108)
आपके पैरों की सुंदरता मनमोहक है. सहज अरुण मेहंदी कलर रेट, मैं बाहर खींचूंगी। [1] चुनबी चुनबी छवि नैनी कोन, ह्येन लीन रहे जावें। हांसी हांसी खिंचत पग अलबेली, अली लमपत संग धवैं.. [2] - श्री अलबेली अली, समय प्रबंधन (108)