श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 100 of 102
स्यामा-स्याम निकुंज-निधि, श्री स्वामी सिरमौर।
रूप ललित उर मैं बसै, जानत नाहीं और॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (37)
स्याम-स्याम निकुंज-निधि, श्री स्वामी सिरमौर। रूप ललित उर मैं बसै, जानत नहीं और.. - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहे (37)