श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 99 of 102

स्वामी बिना बिहार नहि, साधन करो अनेक। तुस कूटत बिन धान के, बड़े चतुर अविवेक॥ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (56) स्वामी बिन बिहार नहीं, अनेक साधन बनाओ। तू धन बिन कुतिया है, अति चतुर अविवेक.. - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहे (56)
श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलिश्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि