नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 12 of 102
बिगरी लेहि सँवारि कै, श्रीकुंजबिहारिनि बाल।
और न ऐसो करि सकै, अपने को प्रतिपाल॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (149)
बिगरी लेहि सांवरी कै, श्रीकुंजबिहारिणी बल। और वह ऐसा नहीं कर सकी, हर पल... - श्री ललित किशोरी देव, आवाज श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत की सखी (149)