नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 13 of 102
बूडत ही विषधार में, लीनी भुजा पसारि।
कुंजबिहारिनि लाडिली, ऐसी मेरी यारि॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (271)
वह खुली बांहों वाला एक ज़हरीला आदमी है। कुंजबिहारिणी लाडिली, ऐसी है मेरी मित्रता.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत की सखी (271)