नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 2 of 102
आये तैं हर्षे नहीं, गये करें नहिं सोग।
ललित किशोरी कें सदा, गौर श्याम संयोग॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (399)
अरे, तुम खुश नहीं हो, तुम खुश नहीं हो, तुम दुखी नहीं हो। ललित किशोरी केन सदा, गौर श्याम स्नयोग.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (399)