अलकैं छूटीं वदन पर, श्रम जल कन अभिराम।
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 3 of 102
अलकैं छूटीं वदन पर, श्रम जल कन अभिराम।
चतुरसखी निरखत रहै, निसि दिन आठौ जाम॥
- श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (3)
अल्केन जल से मुक्त है, श्रम जल कण सुख है। चतुरासखी अलिखित ही रहती है, चाहे कोई भी दिन हो या जाम.. - श्री चतुर दास जी के वचन, मित्र श्री चतुर दास जी के सिद्धांत (3)