जा सुख नैना सुख ढके, सो सुख कह्यो न जाइ।
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 21 of 102
जा सुख नैना सुख ढके, सो सुख कह्यो न जाइ।
विरह पीर जासौं मिटै, सो सुख साँचो ठहराइ॥
- श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (7)
गो सुख नैना सुख चाहे, सो कहो सुख न जाय। विरह की पीड़ा दूर हो जाए तो सुख निर्मित हो जाएगा.. - श्री चतुर दास जी के शब्द, सिद्धांत मित्र श्री चतुर दास जी (7)