जब जागै तब प्रिया भजे, कै सोवै पांव पसारि।
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 22 of 102
जब जागै तब प्रिया भजे, कै सोवै पांव पसारि।
कुंज बिहारिन लाड़ली, नेकु न भूले यारि॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (308)
जब मैं उठा तो प्रिया रोने लगी और पूछने लगी कि वह क्यों सो गई? कुंज बिहारिन लाडली, नेकु ना भूले यारी.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत की सखी (308)