नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 24 of 102

जाकौं चाहैं लाडिली, ताकौं सब सुख होइ। प्रेम प्रिया बिन ना मिलै, यह जानत सब कोइ॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जी की बानी, सिद्धान्त की साखी (500) कौन खुशियाँ चाहता है, कौन सारी खुशियाँ चाहता है। यह तो सब जानते हैं बिना प्रेम प्रियतम के.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जी के वचन, सिद्धांत मित्र (500)
जब प्रिया मानैं अपनपौ, तब लाल रहें आधीन। नामी नाम न भावई