नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 25 of 102
कब देखौं भरि नैन, गौर स्याम दोऊ लाडिले।
श्री हरिदासी ऐंन, करत विहार अभंग जे॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (266)
कब देखूंगा तुझे बोझिल निगाहों से, जरा ध्यान दे प्रिये। श्री हरिदासी ऐं, करत विहार अभंग जे.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (266)