कुंज बिहारीनि बाल कों, सेवें हित सों नित्त।
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 28 of 102
कुंज बिहारीनि बाल कों, सेवें हित सों नित्त।
बिघन न आवें तास कों, तन में मन में चित्त॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (272)
कुंज बिहारिणी बल कोण, सात हित पुत्र नित्ता। आरंभ एक सम तस कोण, तन मन मन मन मन मन मन चित्त.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की आवाज, सिद्धांत की सखी (272)