नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 29 of 102

कुंज बिहारिनि लाडिली, छिन छिन पोषत भाऊ। लिएँ सुभाव सदा रहै, रसिक सिरोमनि राउ॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (280) कुंज बिहारिणी लाडिली, सुपोषित भाई। तनु शुभ भावना सदा गुलाबी मुकुट रेखा.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत साखी (280)
कुंज बिहारीनि बाल कों, सेवें हित सों नित्त। कुंज बिहारिनि लाडिली, जाकौ अपनो कीन।