नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 35 of 102

मेरी प्रिय है लाडिली, छिन छिन प्रीति नवीन। मेरे सुख में अति सुखी, हों उनके सुख लीन॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (277) लाडिली मेरी प्रियतमा है, मेरा नया प्यार छिन गया। मेरे सुखी पुरुष अत्यंत सुखी हों, वे अपनी प्रसन्नता का आनंद लें.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की आवाज, सिद्धांत के मित्र (277)
ललितमोहिनी कृपा करी, निरखे स्यामास्याम।नामी नाम न भावई