निश्चय तन मन प्रेम सों, सुमिरि बिहारिनि बाल।

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 40 of 102

निश्चय तन मन प्रेम सों, सुमिरि बिहारिनि बाल। आजु को लाहौ लीजिये, कौन देख्यौ काल्ह॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (418) तन मन प्रेम पुत्र सुमिरि बिहारिणी शक्ति संकल्प। लो आज का खून, किसे देखोगे? - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत साखी (418)
निजु प्रिय कीनी अपनपौ, तन मन रही समाई। नामी नाम न भावई