नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 41 of 102

नित ही राधाकृष्ण हैं, नित्य सु विपिन विलास। कोटि-कोटि गोलोक लो, एक पत्र प्रकाश॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (171) नित्य राधाकृष्ण हैं, नित्य विपिन विलास हैं। लाख गोलोक ले लो, एक अक्षर प्रकाश.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत साखी (171)
निश्चय तन मन प्रेम सों, सुमिरि बिहारिनि बाल।नामी नाम न भावई