नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 42 of 102

नित्य विहार सार सबको, अति दुर्लभ अगम अपार॥ - श्री नागरी देव जू, श्री नागरीदेव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (4) नित्य विहार सब सार है, अति दुर्लभ आय अपार.. - श्री नागरी देव जू, श्री नागरी देव जू की वाणी, सखा सिद्धांत (4)
नामी नाम न भावईप्राप्ति में संसै नहीं, तन मन वचननि एक।