प्राप्ति में संसै नहीं, तन मन वचननि एक।
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 43 of 102
प्राप्ति में संसै नहीं, तन मन वचननि एक।
कुंजविहारिणी लाडिली, यही हमारी टेक॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (329)
जिस व्यक्ति ने सिद्धि प्राप्त कर ली है वह संत नहीं है, बल्कि वह वह है जो अपने शरीर और मन से बोलता है। कुंजविहारिणी लाडिली, यह हमारी तकनीक है.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत की साखी (329)