रोम रोम आनंद भयो, छिनु छिनु होत हुलास।

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 50 of 102

रोम रोम आनंद भयो, छिनु छिनु होत हुलास। श्री कुंज बिहारिनि लाडिली, सदा हमारे पास॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (273) रोम-रोम में खुशी थी, थोड़ी खुशी थी। श्री कुंज बिहारिणी लाडिली, सदैव हमारे साथ.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत की सखी (273)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई