नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 5 of 102

अनेक जन्म की भूल कों, छिन में देइ मिटाइ। कुंजबिहारिनि लाडिली, जिनके सदा सहाइ॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (270) कई जन्मों की कौन सी गलती एक झटके में मिट सकती है? कुंजबिहारिणी लाडिली, जिनका निरंतर सहयोग.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत सखी (270)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई