नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 59 of 102
श्री स्वामी हरिदास की, सरि नहिं दूजो कोई।
जाकों वै अपनौ करैं, सोई उन सम होईं॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (158)
कोई भी मुझे श्री स्वामी हरिदास की साड़ी नहीं दे सकता। जाकन या आपन नहीं होइन, सोइ उन्म होइन होइन। - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत की सखी (158)