नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 61 of 102
श्री स्वामी हरिदास को, जो कोउ निज करि होय।
रहे प्रिया के सुख सुखी, सहज अपनपो खोय॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जी की बानी, सिद्धान्त की साखी (89)
श्री स्वामी हरिदास को, जो भी इसका मालिक है। प्रिया खुश रहो, अपनों को आसानी से खो दो.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जी की बानी, सिद्धांत की सखी (89)