नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 62 of 102
श्रीराधे राधे जो जन कहै, महा प्रेम रस सोई लहै।
प्रिया लाल तिनके सुख ढरैं, रीझि रीझि अंक में भरैं॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (182)
श्री राधे-राधे, लोग कुछ भी कहें, बहुत प्यार आ रहा है। प्रिया लाल खुशियों के तिनके भरो, रीझी रीझी, अंक भरो.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत की सखी (182)