नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 66 of 102

श्रीस्वामी के पद कमल, हृदय धारि सुभ ठाँव। गौर-श्याम दोउ लाडिले, तिनकौ लाड लडाव॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (394) श्री स्वामी के चरण कमल, हृदय और शुभ स्थान। गौरा-श्याम दो लाडिले, तिनकौ लाड़ लाडव.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत साखी (394)
नामी नाम न भावईश्रुति स्मृति बिचारत तत्व सब, पार न पावे कोई।