श्रुति स्मृति बिचारत तत्व सब, पार न पावे कोई।
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 67 of 102
श्रुति स्मृति बिचारत तत्व सब, पार न पावे कोई।
श्रीहरिदासि प्रगट कियो, नित्यबिहारी सोइ॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (176)
श्रुति, स्मृति, विचित्र तत्त्व, सब कुछ, पर मिलता कोई नहीं। श्री हरिदासी प्रगट हुई, नित्यभारी सोई.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की सखी (176)