बैकुंठ महा बैकुंठ तै, गोलोक परै है धाम।

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 7 of 102

बैकुंठ महा बैकुंठ तै, गोलोक परै है धाम। ए सब सेवत बृन्दाबनहिं, जहाँ बिहरै स्यामा स्याम॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (177) वैकुण्ठ एक महान वैकुण्ठ है, गोलोक एक पराया स्थान है। ए सब सेवत बृंदाबनही, जहां बिहारै स्याम स्याम.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत साखी (177)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई