नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 75 of 102

तुम बिन नैंना ना सुखी, कुंजबिहारिनी प्राण। अंतरगती जानत सबै, कहा मैं करों बखान॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की बानी, सिद्धान्त की साखी (265) नयन बिन तू सुखी नहीं, कुंजबिहारिणी आत्मा। भीतर का मार्ग सब जानते हैं, क्या कहूं.. - श्री ललित किशोरी देव जू की बानी, सिद्धांत की सखी (265)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई