लाख बार हरि हरि कहो एक बार हरिदास

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 77 of 102

लाख बार हरि हरि कहो, एक बार हरिदास। अति प्रसन्न श्री लाड़ली, देत विपिन को वास॥ - श्री ललित किशोरी देव, सिद्धांन्त की साखी (447) हरि हरि कोटि बार कहो, हरिदास एक बार। अति प्रसन्न श्री लाड़ली, दे रही विपीन को सुख.. - श्री ललित किशोरी देव, सिद्धांत साखी (447)
नामी नाम न भावईश्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि