साखी के दोहे, सिद्धांत (22) श्रीधाम वृन्दावन की दिव्य भूमि ब

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 86 of 102

साखी के दोहे, सिद्धांत (22) श्रीधाम वृन्दावन की दिव्य भूमि बहुमूल्य रत्नों से सुशोभित है, अनेक रंगों की लताओं और वृक्षों से सुशोभित है। वहाँ श्री स्वामी हरिदास जी के प्रिय दिव्य युगल श्री श्यामा कुंजबिहारी नित्य विहार के प्रेम में मग्न हैं।
श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलिश्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि